क्रिप्के का संभाव्य विश्व सिद्धांत तथा भारतीय दार्शनिक दृष्टि
Overview & Synopsis
क्रिपके की संभाव्य विश्व अर्थशास्त्र की अवधारणा पश्चिमी दर्शन के इतिहास में विख्यात है। हालांकि, इसी तरह की अवधारणा भारतीय दर्शन के कई स्कूलों में भी पाई जाती है। A→□◊A प्रणाली T दर्शाती है कि यदि कोई वस्तु A है, तो यह आवश्यक रूप से संभव है कि कोई वस्तु A हो। फेयस तथा ब्रौवेरियन ने भी इस प्रणाली को सही माना है। यदि A संभवतः आवश्यक है, तो यह दर्शाता है कि A सत्य है। इस प्रणाली में भी अपनी कुछ समस्याएं हैं। उदाहरण के लिए, स्वयंसिद्ध यह है कि प्रणाली (A→□◊A) यह भी सिद्ध करती है: ◊□A→A। इसका अर्थ है कि ◊□A→A को भी स्वीकार किया जाना चाहिये। किसी विशिष्ट प्रकार की मोडल प्रणाली को अपनाने का तर्कसंगत आधार क्या है ये एक महत्त्वपूर्ण सत्य है। क्रिपके के सिमेंटिक्स में, S5 प्रणाली को उन मॉडलों के साथ पहचाना जा सकता है जो अभिगम्यता संबंध को तुल्यता संबंध के रूप में दर्शाते हैं; इसे क्रिपके S5* कहते हैं, यह S5 का परिमाणित संस्करण है। क्रिप्के जिस प्रकार की संभावना और अनिवार्यता पर विचार करते हैं, वह मूलतः तत्वमीमांसा से संबंधित है। इस शोध पत्र से ज्ञात होता है कि क्रिप्के द्वारा प्रस्तावनात्मक मोडल तर्क प्रणाली पूर्ण रूप से पॉसिबल वर्ल्डस से जुड़ीं हुई समस्याओं को हल नहीं करती। इसी तरह की अवधारणा भारतीय दर्शन के कई स्कूलों में भी पाई जाती है, परन्तु भारतीय ज्ञान परंपरा में भी इस विषय में विस्तृत चर्चा का अभाव है।
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Document Information
| Document Title | क्रिप्के का संभाव्य विश्व सिद्धांत तथा भारतीय दार्शनिक दृष्टि |
|---|---|
| Author / Organization | जमील, सिकंदर |
| Subject & Discipline | Scientific Research & Data |
| Categories | Science & Mathematics |
| Publication Year | 2023 |
| License / Rights | cc-by-4.0 |
| Resource Verification | Listed PDF (Verification Pending) |
| Original Host Website |
Zenodo
(zenodo.org)
|
| File Format | application/pdf (Portable Document Format) |
| Reported File Size | 225.2 KB (230,609 bytes) |
| Language | EN |
| Catalog ID | DOC-2511 |
| Original Source Link | Visit Source Page on zenodo.org » |